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नन्दी कि जन्म कथा एवं कैसे बने महादेव के वाहन जान लीजिए

नन्दी कि जन्म कथा एवं कैसे बने महादेव के वाहन जान लीजिए 
नन्दी 

नमस्कार दोसतो आपका बहुत बहुत 

पौराणिक कथा  यह कथा मिलती है कि शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। शिलाद निरंतर योग तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे अतः उन्होंने संतान की कामना से इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र का वरदान माँगा। इंद्र ने इसमें असर्मथता प्रकट की तथा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। तब शिलाद ने कठोर तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया और उनके ही समान मृत्युहीन तथा दिव्य पुत्र की माँग की। भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। उसको बड़ा होते देख भगवान शंकर ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम में भेजे जिन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि नंदी अल्पायु है। नंदी को जब यह ज्ञात हुआ तो वह महादेव की आराधना से मृत्यु को जीतने के लिए वन में चला गया। वन में उसने शिव का ध्यान आरंभ किया। भगवान शिव नंदी के तप से प्रसन्न हुए व दर्शन वरदान दिया- वत्स नंदी! तुम मृत्यु से भय से मुक्त, अजर-अमर और अदु:खी हो। मेरे अनुग्रह से तुम्हे जरा, जन्म और मृत्यु किसी से भी भय नहीं होगा।" भगवान शंकर ने उमा की सम्मति से संपूर्ण गणों, गणेशों व वेदों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर हो गए। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ। भगवान शंकर का वरदान है कि जहाँ पर नंदी का निवास होगा वहाँ उनका भी निवास होगा। तभी से हर शिव मंदिर में शिवजी के सामने नंदी की स्थापना की जाती है।

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नन्दी कि जन्म कथा एवं कैसे बने महादेव के वाहन जान लीजिए नन्दी कि जन्म कथा एवं कैसे बने महादेव के वाहन जान लीजिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on June 25, 2020 Rating: 5

             बुधवार व्रत कथा क्या है । जानिए 

बुधवार व्रत कथा क्या है  pauranikkathaa.blogspot.com पौराणिक कथा चैनल

नमस्कार मित्रो आपका बहुत बहुत स्वागत है पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे है बुधवार व्रत कथा कें बारे में आइए दोस्तो जानते है है 

                         बुधवार व्रत कथा 

बुध ग्रह की शांति और सर्व-सुखों की इच्छा रखने वाले स्त्री-पुरुषों को बुधवार का व्रत अवश्य करना चाहिए।

बुधवार व्रत कि कथा -   एक समय की बात है एक साहूकार था वह अपनी पत्नी को विदा कराने के लिए अपने ससुराल गया। कुछ दिन वहां रहने के उपरांत उसने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने के लिए कहा किंतु सास-ससुर तथा अन्य संबंधियों ने दामाद से कहा कि  बेटा आज बुधवार है।

बुधवार को किसी भी शुभ कार्य के लिए यात्रा नहीं करते लेकिन वह नहीं माना और हठ करके बुधवार के दिन ही पत्नी को विदा करवाकर अपने नगर को चल पड़ा। राह में उसकी पत्नी को प्यास लगी, उसने पति से पीने के लिए पानी मांगा। साहूकार लोटा लेकर गाड़ी से उतरकर जल लेने चला गया। जब वह जल लेकर वापस आया तो वह बुरी तरह हैरान हो उठा, क्यूंकि उसकी पत्नी के पास उसकी ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा व्यक्ति बैठा था।

पत्नी भी अपने पति को देखकर हैरान रह गई। वह दोनों में कोई अंतर नहीं कर पाई। साहूकार ने पास बैठे शख्स से पूछा कि तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो? उसकी बात सुनकर उस व्यक्ति ने कहा- अरे भाई, यह मेरी पत्नी है। मैं अपनी पत्नी को ससुराल से विदा करा कर लाया हूं, लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसा प्रश्न कर रहे हो? दोनों आपस में झगड़ने लगे। तभी राज्य के सिपाही आए और उन्होंने साहूकार को पकड़ लिया और स्त्री से पूछा कि तुम्हारा असली पति कौन है? उसकी पत्नी चुप रही क्यूंकि दोनों को देखकर वह खुद हैरान थी कि वह किसे अपना पति कहे? साहूकार ईश्वर से प्रार्थना करते हुए बोला "हे भगवान, यह क्या लीला है?"

तभी एक आकाशवाणी हुई कि है मूर्ख आज बुधवार के दिन तुझे शुभ कार्य के लिए गमन नहीं करना चाहिए था। तूने हठ में किसी की बात नहीं मानी। यह सब भगवान बुधदेव के प्रकोप से हो रहा है।

साहूकार ने भगवान श्री बुधदेव से प्रार्थना की और अपनी गलती के लिए प्रभु से क्षमा याचना की। तब मनुष्य के रूप में आए बुध देवता अंतर्ध्यान हो गए। वह अपनी स्त्री को घर ले आया। इसके पश्चात पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार व्रत करने लगे। जो व्यक्ति इस कथा को कहता या सुनता है उसको बुधवार के दिन यात्रा करने का कोई दोष नहीं लगता और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

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Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on October 08, 2019 Rating: 5

हनुमान जी कि जन्म कथा जानिए

          हनुमान जी कि जन्म कथा जानिए 

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                बजरंगबली जी का जन्म कथा 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल में दोस्तो हम बात करने जा रहे हैं बजरंगबली जी कि जन्म कथा कें बारे में आइए दोस्तो जानते हैं

हिंदू धर्म ग्रंथ व पौराणिक कथा कें अनुसार प्रभु  हनुमान जी को अनेक नामों से जाना जाता है, जिसमें से उनका एक नाम वायु पुत्र भी है। जिसका पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है।
 पुराणों की कथा कें अनुसार  हनुमान की माता अंजना संतान सुख से वंचित थी। इस दुःख से पीड़ित अंजना मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा सरोवर के पूर्व में एक नरसिंहा आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक तप एवं उपवास करना पड़ेगा तब जाकर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी।

अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर तप किया था बारह वर्ष तक केवल वायु का ही भक्षण किया तब वायु देवता ने माता अंजना की तपस्या से खुश होकर उसे वरदान दिया जिसके परिणामस्वरूप चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा को अंजना को पुत्र की प्राप्ति हुई। वायु के द्वारा उत्पन्न इस पुत्र को ऋषियों ने वायु पुत्र नाम दिया।

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हनुमान जी कि जन्म कथा जानिए हनुमान जी कि जन्म कथा जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 23, 2019 Rating: 5

सावन सोमवार का प्रारम्भ होना ।

         सावन सोमवार का प्रारम्भ होना जानिए । 

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                         श्रावण सोमवार 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल में दोस्तो हम बात करने जा रहे हैं श्रावण सोमवार कें प्रारंभ कें बारे में आइए दोस्तो जानते हैं । 

भगवान शिव  शंकर के अत्यधिक प्रिय महीने सावन की शुरुआत हो चुकी है। इस बार पहला सोमवार 22 जुलाई को है। पुराणों और हिंदू धर्म ग्रंथ कें मान्यता कें अनुसार यह है कि सावन (श्रावण ) में सोमवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति की  सभी मनोकामना पूरी होती है।भगवान शिव शंकर महादेव की पूजा की साथ गौरा माता की पूजा का भी अधिक विशेष महत्व है। सोमवार के बाद मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। इससे दम्पति में सुख और शांति और समृद्धि आती है। इस वर्ष सावन की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी, जो कि 15 अगस्त को खत्म होगा। सावन में भगवान शिव शंकर महादेव के मंत्रो का जाप करना अत्यधिक शुभ और लाभदायक होता है।
भगवान महादेव  की आराधना करने वाले भक्त सावन (श्रावण )महीने में ही कावड़ यात्रा पर निकलते हैं।

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सावन सोमवार का प्रारम्भ होना । सावन सोमवार का प्रारम्भ होना । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 21, 2019 Rating: 5

महाराज पांडु कि मृत्यु कैसी हुई जानिए ।

      महाराज  पांडु कि मृत्यु कैसी हुई जानिए । 

महाराज पांडु कि मृत्यु कैसी हुई जानिए । पौराणिक कथा चैनल pauranikkathaa.blogspot.com

                    महराज पांडु कि मृत्यु 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल में दोस्तो हम बात करने जा रहे हैं महराज पांडु कें बारे हम जानेंगे कि उनकी मृत्यु कैसी हुई 

महाराज पांडु  का दूसरा विवाह मद्रदेश कि राज कुमारी माद्री से हुआ था । एक समय कि बात थी कि महाराज पांडु शिकार खेलने जंगल गए थें वहा किन्दम नामक ऋषि अपनी पत्नि कें साथ हिरण का रूप धारण किए हुऐ सहवास कर रहे थें महाराज पांडु कि उन पर दृष्टि गई और उन्होने उसी अवस्था में उन पर बाण चला दिया । जिससे वह अपने वास्तविक रूप में आये और महाराज पांडु को श्राप दिया कि तुम जब भी अपनी पत्नि कें साथ सहवास (काम क्रीड़ा ) करोगे तुम्हारी तुरंत ही मृत्यु हो जायेगी । 

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महाराज पांडु कि मृत्यु कैसी हुई जानिए । महाराज पांडु कि मृत्यु कैसी हुई जानिए । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 19, 2019 Rating: 5

श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व ।

श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व ।

श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व । पौराणिक कथा चैनल pauranikkathaa.blogspot.com

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल में हम बात करने जा रहे हैं कि श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व । आइए दोस्तो जानते हैं 

                           श्रावण मास 


हिंदू धर्म ग्रंथ और शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास  भगवान शिव शंकर को प्रिय होने के साथ साथ मनोकामनाओं को पूरा करने का मास भी होता है.  श्रावण मास को वर्ष का सबसे पवित्र मास माना जाता है.

पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण का मास भगवान शिव  शंकर और भगवान  विष्णु का आशीर्वाद लेकर आता है. माना जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे श्रावण माह में कठोरतप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था. यह महीना भगवान शिव के पूजन लिए खास महत्व रखता है.

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श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व । श्रावण मास क्यू मनाया जाता हैं । जानिए इसका महत्व । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 17, 2019 Rating: 5

गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए ।

  गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए । 

गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए । pauranikkathaa.blogspot.com पौराणिक कथाएँ

                             गुरु पूर्णिमा     

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल  में हम बात करने जा रहे हैं गुरु पूर्णिमा कें बारे में जी हाँ दोस्तो हम बताएंगे कि गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए यह कथा ।  

हिंदू धर्म और शास्त्रों कें अनुसार आषाढ़  मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी अत्यधिक  सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अत्यधिक  गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।

गुरु पूर्णिमा का महत्व - पौराणिक गाथाओं एवं  हिंदू धर्म और शास्त्रों की मानें तो अनेक ग्रन्थों की रचना करने वाले भगवान वेदव्यास को गुरु माना गया हैं। बताया जाता हैं कि आज से लगभग 3 हजार ई. पूर्व आषाढ़ माह की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। तब से ही उनके मान-सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती हैं। इस दिन अत्यधिक जगह लोग भगवान महर्षि वेदव्यास जी कि पूजा करते हैं  पूजन कर उनकी ग्रंथो  को पढ़ते हैं। 

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गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए । गुरु पूर्णिमा क्यू मनाई जाती हैं जानिए । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 16, 2019 Rating: 5

बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । जाने कहा हैं

बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । जाने कहा हैं 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथाएँ में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे महाभारत काल का ऐसा वीर योध्दा बर्बरीक कें बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेंगे बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । वह अब कहा हैं आइए मित्रो । । । 

बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । जाने कहा हैं  pauranikkathaa.blogspot.com पौराणिक कथाएँ

                  वीर बर्बरीक (खटुश्याम जी )

मित्रो आज भी महाभारत युद्घ में पांडवों कि जीत में सबसे बड़े योगदान कि बात करे तो वह था घटोत्कच पुत्र बर्बरीक का था बर्बरीक ने जिस वृक्ष में अपना बाण चलाया था वह वृक्ष आज भी स्थित हैं हरयाणा कें हिसार जिले में यह स्थान वीर वरवरन कें नाम से जाना जाता हैं और हैरानी कि बात यह हैं कि कि वह पीपल का वृक्ष आज भी वही ही स्थित हैं उसके पत्ते में आज भी छेद हैं और उसमे जितने भी पत्ते आते हैं उनमे भी छेद होता हैं 

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बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । जाने कहा हैं बर्बरीक ने जिस वृक्ष में महाभारत काल में तीर चलाया था । जाने कहा हैं Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on July 16, 2019 Rating: 5

जानिए यह प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कें बारे में

  जानिए यह प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर 


नमस्कार दोस्तो आपका बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे हैं प्रसिद्ध मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर कें बारे में जी आइए दोस्तो जानते हैं । हम 

                      काशी विश्वनाथ मंदिर 


जानिए यह प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कें बारे में  pauranikkathaa.blogspot.com

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्करद्वारा सन 1780 में करवाया गया था।बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 1000 कि.ग्रा शुद्ध सोने द्वारा बनवाया गया था।

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ब्रम्हा देव के पुत्रो के बारे में जानिए

       ब्रम्हा जी के पुत्रो के बारे में जानिए । 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे हैं ब्रह्मा देव के पुत्रो के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेंगे आइए जानते हैं । 

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                            ब्रम्हा  देव 

पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रम्हा देव के पुत्र विष्वकर्मा, अधर्म, अलक्ष्मी, आठवसु, चार कुमार, 14 मनु, 11 रुद्र, पुलस्य, पुलह, अत्रि, क्रतु, अरणि, अंगिरा, रुचि, भृगु, दक्ष, कर्दम, पंचशिखा, वोढु, नारद, मरिचि, अपान्तरतमा, वशिष्‍ट, प्रचेता, हंस, यति आदि मिलाकर कुल 59 पुत्र हैं यह सभी ब्रम्हा जी के पुत्र हैं 


जानिए 

हिंदू धर्म ग्रंथ एवं हिंदू धर्म के अनुसार ब्रह्मा देव के प्रसिद्ध पुत्र 
 :
.मन से मारिचि।
.नेत्र से अत्रि।
.मुख से अंगिरस।
.कान से पुलस्त्य।
.नाभि से पुलह।
.हाथ से कृतु।
.त्वचा से भृगु।
.प्राण से वशिष्ठ।
.अंगुष्ठ से दक्ष।
.छाया से कंदर्भ।
.गोद से नारद।
.इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन और सनतकुमार।
.शरीर से स्वायंभुव मनु और शतरुपा।
.ध्यान से चित्रगुप्त।
.प्राण से वशिष्ठ।
.अंगुष्ठ से दक्ष।
.छाया से कंदर्भ।
.गोद से नारद।


.ध्यान से चित्रगुप्त।


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ब्रम्हा देव के पुत्रो के बारे में जानिए ब्रम्हा देव के पुत्रो के बारे में जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 30, 2019 Rating: 5

कामदेव कौन हैं एवं उनके अनेक नाम और शक्ति जानिए

कामदेव कौन हैं एवं उनके अनेक नाम और शक्ति जानिए 

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                          कामदेव 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चैनल में दोस्तो हम बात करने जा रहे हैं कामदेव के बारे में जी हाँ दोस्तो कामदेव आइए दोस्तो हम जानते हैं 

पुराणों व हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार कामदेव को हिंदू शास्त्रों में प्रेम और काम का देवता माना गया है।उनका स्वरूप युवा और आकर्षक है। वे विवाहित हैं और रति उनकी पत्नी हैं। वे अत्यधिक शक्तिशाली हैं कि उनके लिए किसी प्रकार के कवच की कल्पना नहीं की गई है। उनके अन्य नामों में रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मनमथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत, पुष्पवान, पुष्पधंव आदि अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। दोस्तो कामदेव के भगवान शिव शंकर के क्रोध से भस्म हो जाने के बाद  उन्हे पुनः प्रभु श्री कृष्ण के पुत्र प्रदुम्न के रूप में दौउपर युग में जन्म लिया इनका विवाह वज्रनाभ कि पुत्री प्रभावती से हुआ था इनका पुत्र का नाम अनिरुद्ध था जिनका विवाह वाणासुर कि पुत्री ऊषा से विवाह हुआ 

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कामदेव कौन हैं एवं उनके अनेक नाम और शक्ति जानिए कामदेव कौन हैं एवं उनके अनेक नाम और शक्ति जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 24, 2019 Rating: 5

महाभारत के विदुर थें यम राज के अवतार जानिए ।

महाभारत के विदुर थें यम राज के अवतार जानिए । 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे हैं महाभारत के पात्र विदुर काका के बारे आइए दोस्तो हम जानते हैं 

महाभारत के विदुर थें यम राज के अवतार जानिए । pauranikkathaa.blogspot.com
                       

                       महात्मा विदुर 

महाभारत एवं हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार विदुर धृतराष्ट्र एवं पांडु के अनुज थें और कुरु वंश और हस्तिनापुर के महामंत्री थें वह पांडव एवं कौरव के काका थें । और ऐसा कथन मिलता हैं कि महाभारत में महात्मा विदुर मृत्यु के राजा यमराज के अवतार थे। यमराज को परम तजस्वी ऋषि माण्डव्य के श्राप के कारण मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ा। विदुर धर्म शास्त्र और अर्थशास्त्र में बड़े निपुण थे। उन्होंने जीवनभर कुरुवंश के हित के लिए कार्य किया। और उन्होने महाभारत के युध्द में भाग नहीं लिया और वह तीर्थ यात्रा के लिए चले गए उन्हे पहले से ही ज्ञात था कि यदि पांडव और कौरव के बीच युद्घ हुआ तो कौरव कुरु कुल का सर्वनाश होगा और वैसा हुआ भी । 

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शिव जी (महादेव ) बाघ कि खाल क्यू पहनते हैं जानिए

शिव जी (महादेव ) बाघ कि खाल क्यू पहनते हैं जानिए

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                         महादेव जी 



नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो हम बात करने जा रहे हैं शिव जी के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेंगे कि कि शिव जी महादेव बाघ कि खाल क्यू पहनते हैं आइए जानते हैं 

पौराणिक कथा एवं शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव शंकर एक बार ब्रह्मांड का गमन करते-करते एक जंगल में पहुंचे जो कि कई ऋषि-मुनियों का स्थान था। यहां वे अपने परिवार समेत रहते थें भगवान शिव इस जंगल से निर्वस्त्र गुजर रहे थे,। शिव जी  इस बात से अनजान थे कि उन्होंने वस्त्र धारण नहीं कर रखे। शिवजी का शरीर देख ऋषि-मुनियों की पत्नियां उनकी ओर आकर्षित होने लगी।वह धीरे-धीरे सभी कार्यों को छोड़ केवल शिव शंकर  पर ध्यान देने लगीं। तत्पश्चात जब ऋषियों को यह ज्ञात हुआ कि शिवजी के कारण (जिन्हें ऋषि एक साधारण मनुष्य मान रहे थे) उनकी पत्नियां मार्ग से भटक रही हैं तो वे अत्यधिक क्रोधित हो गए सभी ऋषियों ने शिव जी को सबक सिखाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने महादेव के मार्ग में एक बड़ा गड्ढा बना दिया, मार्ग से गुजरते हुए शिवजी उसमें गिर गए।जैसे ही ऋषियों ने दिखा कि शिव जी उनकी चाल में फंस गए हैं, उन्होंने उस गड्ढे में एक बाघ को  गिरा दिया, ताकि वह महादेव  को मारकर खा जाए।
लेकिन  शिवजी ने स्वयं उस बाघ को मार डाला और उसकी खाल को पहन गड्ढे से बाहर आ गए। तब सभी ऋषि-मुनियों को यह आभास हुआ कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं है। तब ऋषियों ने उनसे उनका परिचय पूछा जब उन्हे ज्ञात हुआ कि यह भगवान शिव शंकर हैं तभी से महादेव बाघ कि खाल पहने हैं । 

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शिव जी (महादेव ) बाघ कि खाल क्यू पहनते हैं जानिए शिव जी (महादेव ) बाघ कि खाल क्यू पहनते हैं जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 12, 2019 Rating: 5

महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए

महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए 


नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं  महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए जी हाँ दोस्तो हम जानेगे । आइए दोस्तो हम जानते हैं

महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए pauranikkathaa.blogspot.com पौराणिक कथा चैनल


                           तांडव नृत्य 

पुराणों व हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार तांडव भगवान शिव शंकर का प्रिय नृत्य हैं । यह नृत्य कई प्रकार के होते हैं । भगवान शिव के तांडव स्वरूप को नटराज कहा जाता हैं । तांडव में भगवान शिव शंकर बौने राक्षस के उपर नृत्य करते हैं जो । अज्ञानता का प्रतीक हैं । ऊपर बाएँ हाँथ में अग्रि या दर्शाती हैं कि भगवान शिव सृष्टि का विनाश करके पुनः निर्माण कार्य ब्रह्मा जी को सौप रहे हैं दूसरा बाँया हाँथ जो भगवान के पैर के पास हैं वह सार्वभौम स्वतंत्रा का प्रतीक हैं तांडव करते समय भगवान शिव के डमरू से 14 मंत्र निकले थें जिसे महेश्वर सूत्र के नाम से जाना जाता हैं । 


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महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए महादेव का प्रिय नृत्य तांडव के बारे में जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 09, 2019 Rating: 5

सूर्य पुत्र कर्ण को इन्द्र कि अमोघ शक्ति कैसे मिली जानिए

        सूर्य पुत्र कर्ण को इन्द्र कि अमोघ शक्ति कैसे मिली जानिए 


नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं  सूर्य पुत्र कर्ण को इन्द्र कि अमोघ शक्ति कैसे मिली के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे । आइए दोस्तो हम जानते हैं

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                    इन्द्र अमोघ शक्ति 

महाभारत एवं हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार जब महाभारत का युद्घ में इन्द्र देव व प्रभु श्री को पता था । कि जब तक कर्ण के पास कवच कुंडल हैं उसे कोई परास्त नहीं कर सकता । तब इन्द्र देव ने इन्द्र देव ने कर्ण से छल से कवच कुंडल लिया फिर इन्द्र ने तुंरत वहां से दौड़ ही लगा दी और दूर खड़े रथ पर सवार होकर भाग गए। लेकिन कुछ मील जाकर इन्द्र का रथ नीचे उतरकर भूमि में धंस गया। तभी आकाशवाणी हुई, 'देवराज इन्द्र, तुमने बड़ा पाप किया है। अपने पुत्र अर्जुन की जान बचाने के लिए तूनेयह छल रचा अब यह रथ यहीं धंसा रहेगा और तू भी यहीं धंस जाएगा। तब इंद्र ने कर्ण को कवच कुंडल के बदले अमोघ अस्त्र दिया।

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जनमेजय कौन था । एवं नागदाह यज्ञ क्यू कराया जानिए

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जनमेजय 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं जनमेजय  के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे जनमेजय कौन था । एवं नागदाह यज्ञ क्यू कराया जानिए । आइए 
 दोस्तो हम जानते हैं

        
जनमेजय हिंदू धर्म ग्रंथ  महाभारत के अनुसार कुरुवंश का राजा था। वह वीर अभिमन्यु का पोता था । और राजा परीक्षित का पुत्र था । महाभारत युद्ध में अर्जुनपुत्र अभिमन्यु जिस समय वीर गति को प्राप्त हुआ उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उत्तरा का गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ जो महाभारत युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठा। जनमेजय इसी परीक्षित तथा मद्रावती का पुत्र था। 

                        नागदाह यज्ञ कि कथा 

जनमेजय सर्वश्रेठ धनुधर अर्जुन के पुत्र वीर अभिमन्यु  का पुत्र राजा परीक्षित  का पुत्र था जनमेजय को जब यह पता चला कि मेरे पिता कि मृत्यु तक्षक नामक सर्प के दंश से हुई हैं तो वह क्रोधित होकर विश्व के सभी सर्पों को मारने के लिए नागदाह यज्ञ करवाया । उन यज्ञों कि अग्नि में नागों को पटक दिया जाता था । एक विशिष्ट मंत्र द्वारा नाग स्वयं यज्ञ के पास पहुँच जाते हैं 

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जनमेजय कौन था । एवं नागदाह यज्ञ क्यू कराया जानिए जनमेजय कौन था । एवं नागदाह यज्ञ क्यू कराया जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 08, 2019 Rating: 5

उत्तन्ग ऋषि कि भूल के कारण उन्हे नहीं मिला अमृत ।

उत्तन्ग ऋषि कि भूल के कारण उन्हे नहीं मिला अमृत ।

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                            उत्तन्ग ऋषि     


नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं महर्षि उत्तन्ग ऋषि  के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे  ऋषि कि भूल के कारण उन्हे नहीं मिला अमृत ।आइए दोस्तो हम जानते हैं

महाभारत और हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार जब प्रभु श्री कृष्ण महाभारत युद्घ के समाप्त के बाद हस्तिनापुर से द्वारिका नगरी वापिस लौट रहे थें । तो वहा महर्षि उत्तांग तपस्या कर रहे थें । वह परम तेजस्वी  थें उनमे पूरा ब्रह्मांड नष्ट करने कि शक्ति थी । प्रभु श्री कृष्ण उनसे मिले और महाभारत युद्घ कि जानकारी दी जिससे वह क्रोधित हो गए कि आपने महाभारत का इतना विनाशकारी युद्घ रोका क्यू नहीं । इसलिए में तुम्हे श्राप देता हू । प्रभु श्री कृष्ण ने उन्हे समझाए कि वह स्वयं त्रिलोक पति हैं उन पर किसी भी श्राप का असर नहीं होता और अगर आपने मुझे श्राप दिया तो आपका तपोबल शून्य हो जाएगा । फिर महर्षि ने प्रभु से क्षमा मांगी । श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा उन्होने उनसे कहा कि मुझे बस यह वरदान चाहिए कि मुझे जब भी जल कि आवश्यकता हो मुझे जल प्राप्त हो जाऐ प्रभु ने वरदान दे दिया । जब महर्षि को प्यास लगी तो उन्होने प्रभु श्री कृष्ण का अनुसरण किया और प्रभु श्री कृष्ण ने इन्द्र देव से उन्हे जल कि जगह अमृत पिलाने को कहा इन्द्र देव ने महर्षि कि परीक्षा लेने चंडाल का रूप लेकर चले गए और उन्हे जल पीने को कहा महर्षि ने कहा में चंडाल के हाँथ से अमृत तक नहीं पी सकता फिर पानी क्या हैं । और वह परीक्षा में असफल हो गए और अमृत से वंचित रह गए 

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उत्तन्ग ऋषि कि भूल के कारण उन्हे नहीं मिला अमृत ।  उत्तन्ग ऋषि कि भूल के कारण उन्हे नहीं मिला अमृत । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 05, 2019 Rating: 5

महाशिवरात्रि क्यू मनाई जाती हैं । जानिए

     महाशिवरात्रि क्यू मनाई जाती हैं जानिए 

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                            महाशिवरात्रि

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं महाशिवरात्रि  के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे कि महाशिवरात्रि का हिंदू धर्म का पर्व क्यू मनाया जाता हैं   आइए दोस्तो हम जानते हैं


हिंदू धर्म ग्रंथ एवं पुराणों के उल्लेख के अनुसार  बताया गया है कि महाशिवरात्रि क्यू मनाई जाती हैं  इस बारे में बहुत से कथन हैं. महाशिवरात्रि मानने के कारण बहुत से हैं जैसे की- तीन कथाएँ हैं 

                            पहली कथा 

हिंदू धर्म ग्रंथ के उल्लेख अनुसार एक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन में सबसे पहले अत्यधिक जहरीला कालकूट विष निकला  था जिसको भगवान शिव शंकर  ने संपूर्ण ब्राह्मांड की रक्षा के लिए पी लिया था। तभी से भगवान का कंठ नीला पड गया. तभी से भगवान को देवो के देव महादेव कहा जाने लगा. माना जाता है की समुद्र मंथन के इस दिन के अवसर को ही शिवरात्रि थी.

                             दूसरी कथा 

पुराणों और हिंदू धर्म ग्रंथ के अनुसार हिंदू धर्म में पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव शंकर के जन्म दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माना जाता है की भगवान महादेव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। और तभी से इस दिन शिवलिंग की पूजा की जाती है। और शिवालयों में भक्त शिव की पूजा अर्चन करते हैं इस दिन भक्तों का हर्षौल्लास बढ़ जाता हैं । 

                        तीसरी कथा 

पुराणों  एवं हिंदू धार्मिक ग्रंथो के उल्लेखनुसार एक और मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव शंकर जी का माता पार्वती जी के साथ विवाह हुआ था। इस दिन भक्त भगवान शिव शंकर  और माँ पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं और शुख और शांति का आशीर्वाद कि कामना करते  हैं.

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महाशिवरात्रि क्यू मनाई जाती हैं । जानिए महाशिवरात्रि क्यू मनाई जाती हैं । जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 03, 2019 Rating: 5

महादेव से जुड़े रोचक तथ्य जानिए

          महादेव से जुड़े रोचक तथ्य जानिए 

महादेव महाकाल  से जुड़े रोचक तथ्य जानिए pauranikkathaa.blogspot.com पौराणिक कथा चैनल

                        महाकाल महादेव 

नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं महादेव  जी के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे महादेव जी से जुड़े रोचक तथ्य  के बारे में आइए दोस्तो हम जानते हैं

1. भगवान शिव के 3 आँख में हिंदू मान्यता के अनुसार तभी खुलती हैं जब महादेव अत्यधिक क्रोध में आ जाते हैं उस समय जो भी उनके सामने होता हैं वह जलकर भस्म हो जाता हैं । 

2.भगवान महाकाल के कोई माता पिता नहीं हैं उन्हे अनादि कहा गया हैं । अनादि का मतलब जो हमेशा से था जिसके जन्म कि कोई तिथि नहीं हैं 

3.अगर महिलाए भगवान महादेव शिव शंकर कि लगातार 16 सोमवार को व्रत रखे तो कुंवारी महिलाओ को अच्छा वर प्राप्त होता हैं । वही विवाहित महिलाओ के पति नेक मार्ग पर चलते हैं । 

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महादेव से जुड़े रोचक तथ्य जानिए महादेव से जुड़े रोचक तथ्य जानिए Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 03, 2019 Rating: 5

अलायुध राक्षस के बारे में जानिए ।

          अलायुध राक्षस के बारे में जानिए 


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नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा हैं अलायुध जी के बारे में जी हाँ दोस्तो हम जानेगे अलायुध  के   के बारे में आइए दोस्तो हम जानते हैं

                              अलायुध 
अलायुध हिन्दू मान्यताओं और पौराणिक महाकाव्य महाभारत के उल्लेखानुसार वकासुर का भाई था, जो एक विशाल राक्षस था। अलायुध ने महाभारत के युध्द कौरव पक्ष की तरफ से युद्ध किया था। भीमसेन से इनका युद्ध अधिक समय तक चला था तथा इनका वध भीमसेन के पुत्र महाबली घटोत्कच के हाथ हुआ था।

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अलायुध राक्षस के बारे में जानिए । अलायुध राक्षस के बारे में जानिए । Reviewed by पौराणिक कथा चैनल on March 02, 2019 Rating: 5
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