वराह अवतार लेने का कारण जानिए
वराह भगवान
त्रिलोक पति विष्णु अवतार
नमस्कार दोस्तो आपका बहुत बहुत स्वागत हैं पौराणिक कथा चेनेल में दोस्तो आज हम बात करने जा रहे त्रिलोक पति विष्णु के अवतार वराह अवतार के बारे में दोस्तो हम जानकारी देंगे वराह अवतार लेने के कारण आइए दोस्तो जानते हैं हम ।
पौराणिक कथा एवं वराहपुराण हिंदू धर्म के अनुसार हिरण्याक्ष ने दिति जी के गर्भ से जन्म लिया तो पूरी धरती हिलने लगी. और आकाश में लोग इधर-उधर जाने लगे मानो महा भयंकर प्रलय आ गया। जब हिरण्याक्ष जवान हुआ तो वह तप करने एक पर्वत जा पहुंचा. वहाँ उसने अत्यधिक घोर तपश्या की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी कहा वरदान मांगो हिरण्याक्ष ने वरदान माँगा की मुझे देवता, असुर और मनुष्य में से कोई भी ना मार (वध कर ना सके. )पितामह ब्रह्मदेव ने वरदान दे दिया वरदान पाते हिरण्याक्ष अपने आप को सर्वशक्तिमान समझ बैठा एक हाथ में गदा ले इंद्र लोक जा पहुंचा. उसके आने की खबर सुनते ही इन्द्रलोक में भगदड़ मच गई. इंद्र देव समेत सभी देवता वहा से भाग गए हिरण्याक्ष ने पुरे स्वर्ग में अपना अधिकार स्थापित कर लिया.जब उसे कोई नही मिला तो वह वरुण देव के पास गया वहाँ पहुँचते ही उसने वरुण को ललकारा और कहा वरुण देव तुमने देत्यो को हराकर राजसूय यज्ञ किया था. तो मुझे परास्त करो परन्तु उसे ब्रह्म देव का वरदान था इसलिए उसे वरुण देव परास्त नही कर सकते उन्होंने कहा की तुम विष्णु भगवान से युद्घ करो तुम उनके पास जाओ और अपने पराक्रम उन के सामने दिखाओ.यह सुन हिरण्याक्ष से रहा नही गया. वह भगवान विष्णु जी की खोज में इधर उधर भटकने लगा. जब उसे भगवान विष्णु नही मिले तो उसने पूरी पृथ्वी को गोल गेंद के रूप में समेट लिया और समुद्र के अंदर पाताल लोक में चला गया तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण किया और पाताल लोक हिरण्याक्ष के समक्ष पहुंचे. दोनो में युद्घ हुआ और अंत में उसने जब वराह जी पर एक गदा से प्रहार किया तो भगवान वराह ने उस गदा को पकड़ दूर फेक दिया. वराह भगवान ने एक मुठ्ठी के प्रहार से त्रिलोक पति विष्णु धाम पहुंचा दिया।
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वराह अवतार लेने का कारण जानिए
Reviewed by पौराणिक कथा चैनल
on
December 14, 2018
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